उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षा देने वाले लाखों विद्यार्थियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर पास होने के लिए कितने नंबर चाहिए। अगर आप भी यूपी बोर्ड के 2026 के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं और यह जानना चाहते हैं कि पास होने की न्यूनतम सीमा क्या है, तो यह पूरी गाइड आपके लिए ही है।
यहां हम आपको बताएंगे कि कितने प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है, थ्योरी और प्रैक्टिकल में अलग-अलग क्या नियम हैं, किन स्थितियों में कंपार्टमेंट की परीक्षा दी जा सकती है, और अगर कोई विषय रह जाता है तो आपके पास क्या विकल्प होंगे। इस गाइड को पढ़ने के बाद आपको यूपी बोर्ड की पासिंग मार्क्स और कंपार्टमेंट नीति से जुड़ी हर एक बात साफ हो जाएगी।
यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 में पास होने के लिए कितने मार्क्स चाहिए – पूरी जानकारी
यूपी बोर्ड कक्षा दसवीं और बारहवीं की परीक्षा पास करने के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर किसी विषय में सौ में से सौ नंबर की परीक्षा है, तो आपको कम से कम 33 नंबर हासिल करने होंगे।
यह नियम दसवीं और बारहवीं दोनों कक्षाओं पर समान रूप से लागू होता है। खास बात यह है कि यह 33 प्रतिशत की शर्त सिर्फ एक विषय या कुल अंकों के लिए नहीं है, बल्कि हर एक विषय में अलग से पूरी करनी होती है। यानी अगर आपने चार विषयों में अच्छे अंक लिए हैं लेकिन एक विषय में 33 में से भी कम आए हैं, तो आप उस एक विषय में फेल माने जाएंगे।
थ्योरी और प्रैक्टिकल में अलग-अलग पासिंग मार्क्स का नियम
यह समझना बहुत जरूरी है कि यूपी बोर्ड में जिन विषयों में प्रायोगिक यानी प्रैक्टिकल परीक्षा होती है, वहां पर थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों में अलग-अलग 33 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होता है। उदाहरण के लिए कक्षा बारहवीं के विज्ञान संकाय के विषयों में थ्योरी पेपर 70 अंकों का होता है और प्रैक्टिकल 30 अंकों का। ऐसे में आपको थ्योरी में कम से कम 23 से 24 अंक और प्रैक्टिकल में कम से कम 10 अंक लाने होंगे।
अगर आपने थ्योरी में तो अच्छे अंक लिए लेकिन प्रैक्टिकल में 33 प्रतिशत से कम आए, तो भी आप उस विषय में अनुत्तीर्ण माने जाएंगे। वहीं जिन विषयों में प्रैक्टिकल नहीं होता, वहां पूरे सौ अंकों की लिखित परीक्षा में 33 अंक लाना जरूरी है। कुल मिलाकर बात यह है कि हर विषय के हर हिस्से में आपको अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
कंपार्टमेंट परीक्षा किसे देने का अधिकार है और इसके नियम क्या हैं?
अब बात सबसे अहम सवाल पर आती है कि अगर कोई छात्र फेल हो जाता है, तो क्या होता है? यूपी बोर्ड का कंपार्टमेंट सिस्टम छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है। अगर कोई विद्यार्थी एक या दो विषयों में अनुत्तीर्ण होता है, तो उसे कंपार्टमेंट परीक्षा देने का अवसर मिलता है। इसका मतलब यह है कि उसे पूरा साल दोबारा नहीं लगाना पड़ता, बल्कि वह सिर्फ उन्हीं विषयों की परीक्षा देगा जिनमें वह फेल हुआ है।
लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि अगर कोई छात्र दो से अधिक विषयों में यानी तीन या उससे ज्यादा विषयों में फेल हो जाता है, तो उसे पूरे साल की पढ़ाई दोहरानी होगी और अगले साल फिर से सभी विषयों की परीक्षा देनी होगी। इसलिए कंपार्टमेंट की सुविधा सिर्फ उन्हीं छात्रों के लिए है जो अधिकतम दो विषयों में पिछड़े हैं।
ग्रेस मार्क्स की सुविधा – क्या होता है जब आप बहुत कम अंकों से फेल होते हैं?
यूपी बोर्ड की एक और अहम सुविधा ग्रेस मार्क्स की है। बोर्ड के नियमों के अनुसार, कुछ मामलों में अगर कोई छात्र किसी एक विषय में बहुत कम अंकों से फेल होता है, तो उसे ग्रेस मार्क्स देकर पास कर दिया जाता है।
यह पूरी तरह से बोर्ड के विवेक पर निर्भर करता है और यह सुविधा हर साल बदलती रहती है। आमतौर पर यह तब लागू होती है जब किसी छात्र के कुल अंक अच्छे हों लेकिन किसी एक विषय में वह मामूली अंतर से फेल हो रहा हो। हालांकि, ग्रेस मार्क्स पर पूरी तरह निर्भर न रहें। कोशिश यही करें कि हर विषय में 33 अंकों का आंकड़ा पार कर लें।
यूपी बोर्ड का ग्रेडिंग सिस्टम – D ग्रेड का क्या मतलब है?
यूपी बोर्ड में अंकों के साथ ग्रेड भी दिए जाते हैं। इस ग्रेडिंग सिस्टम को समझना भी जरूरी है। जो छात्र 33 से 40 प्रतिशत अंक लाते हैं, उन्हें D ग्रेड दिया जाता है। यही वह न्यूनतम ग्रेड है जिसके साथ आप पास माने जाते हैं। इससे नीचे E1 यानी 21 से 32 प्रतिशत और E2 यानी 21 प्रतिशत से कम अंकों पर आपको फेल माना जाता है। इसलिए जब आप अपना रिजल्ट देखें, तो सिर्फ अंकों पर ही नहीं बल्कि ग्रेड पर भी ध्यान दें। D ग्रेड से ऊपर का कोई भी ग्रेड यानी C2, C1, B2, B1, A2 या A1 होने का मतलब है कि आप न सिर्फ पास हैं बल्कि अच्छे अंकों से पास हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल: क्या दसवीं और बारहवीं के लिए पासिंग मार्क्स अलग-अलग हैं?
जवाब: नहीं, यूपी बोर्ड में दसवीं और बारहवीं दोनों कक्षाओं के लिए पासिंग मार्क्स एक समान 33 प्रतिशत हैं। यह नियम दोनों कक्षाओं पर समान रूप से लागू होता है।
सवाल: क्या कंपार्टमेंट परीक्षा देने के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता है?
जवाब: हां, रिजल्ट आने के बाद यूपी बोर्ड उन छात्रों के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा के आवेदन की प्रक्रिया शुरू करता है। आपको निर्धारित तिथियों के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होता है और परीक्षा शुल्क जमा करना होता है।
सवाल: अगर मैं दो से अधिक विषयों में फेल हो जाऊं तो क्या मैं कंपार्टमेंट दे सकता हूं?
जवाब: नहीं, यूपी बोर्ड के नियमों के अनुसार, जो छात्र दो से अधिक विषयों में अनुत्तीर्ण होते हैं, वे कंपार्टमेंट परीक्षा के पात्र नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें अगले शैक्षिक सत्र में दोबारा सभी विषयों की परीक्षा देनी होती है।
सवाल: क्या प्रैक्टिकल में फेल होने पर कंपार्टमेंट मिलता है?
जवाब: हां, अगर आप किसी विषय के प्रैक्टिकल में फेल होते हैं और बाकी सब ठीक है, तो आपको कंपार्टमेंट परीक्षा का अवसर मिलता है। लेकिन ध्यान रखें कि कंपार्टमेंट परीक्षा में आपको प्रैक्टिकल फिर से देना होगा।
सवाल: क्या 33 प्रतिशत अंक कुल मिलाकर चाहिए या हर विषय में?
जवाब: यह बहुत जरूरी सवाल है। यूपी बोर्ड में हर विषय में अलग से 33 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है। सिर्फ कुल अंकों में 33 प्रतिशत होना काफी नहीं है। हर विषय में आपको न्यूनतम सीमा पूरी करनी होगी।
सवाल: क्या रिजल्ट के बाद पुनर्मूल्यांकन यानी रीचेकिंग करवा सकते हैं?
जवाब: हां, यूपी बोर्ड रिजल्ट आने के बाद छात्रों को रीचेकिंग या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने की सुविधा देता है। इसके लिए एक निर्धारित शुल्क देना होता है और एक तय समय सीमा के भीतर आवेदन करना होता है।
अंतिम सुझाव: क्या करें अगर आप कंपार्टमेंट की तैयारी कर रहे हैं
अगर आपको लगता है कि आप एक या दो विषयों में 33 अंक नहीं ला पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कंपार्टमेंट परीक्षा आपके लिए दूसरा मौका है। सबसे पहले रिजल्ट आने पर ऑफिशियल वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाकर अपना मार्कशीट ध्यान से देखें। पुष्टि करें कि कौन से विषय में आप कितने अंकों से फेल हुए हैं। फिर बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर कंपार्टमेंट परीक्षा के आवेदन की तारीखों पर नजर रखें। समय रहते आवेदन कर दें।
उसके बाद सिर्फ उन्हीं विषयों पर फोकस करें जिनमें आपको दोबारा परीक्षा देनी है। पिछले साल के प्रश्न पत्र हल करें और जिन टॉपिक्स में कमजोरी थी, उन्हें मजबूत करें। याद रखें, कंपार्टमेंट देना कोई शर्म की बात नहीं है। कई सफल छात्रों ने अपने जीवन में कभी न कभी कंपार्टमेंट परीक्षा दी है और आगे चलकर बेहतर प्रदर्शन किया है। आपका एक साल खराब होने से बेहतर है कि आप कंपार्टमेंट देकर समय बचाएं और आगे बढ़ें। शुभकामनाएं।
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